त्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो ने हड़कंप मचा रखा है। हरिद्वार जिले की झबरेड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति का एक अनोखा 'विरोध प्रदर्शन' सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्षेत्र में बिजली कटौती से परेशान जनता की आवाज उठाने के लिए विधायक ने कानून को हाथ में लेते हुए खुद ही बिजली के खंभे पर चढ़कर अधिकारियों के घरों की बिजली काट दी।
खंभे पर विधायक: जब अधिकारियों को झेलना पड़ा 'अंधेरा'
हरिद्वार के रुड़की इलाके में हुई यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। विधायक वीरेंद्र जाति का आरोप है कि उनके क्षेत्र झबरेड़ा में पिछले कई दिनों से अघोषित बिजली कटौती हो रही है। ग्रामीण इलाकों में 5 से 8 घंटे तक बिजली गुल रहने से न केवल आम जनजीवन प्रभावित है, बल्कि किसानों और छोटे कारोबारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
1. अधिकारियों के आवासों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
विधायक ने केवल बयानबाजी करने के बजाय सीधा एक्शन लेने का फैसला किया। वे अपने समर्थकों के साथ सीढ़ी और तार काटने वाले औजार लेकर रुड़की के पॉश इलाके में स्थित बिजली विभाग के अधिकारियों के सरकारी आवासों पर जा पहुंचे।
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पहला शिकार: सुपरिटेंडेंट इंजीनियर विवेक राजपूत। विधायक ने उनके घर के बाहर खंभे पर चढ़कर बिजली कनेक्शन काट दिया।
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अगले निशाने: इसके बाद उन्होंने चीफ इंजीनियर अनुपम सिंह और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विनोद पांडे के घरों की बिजली भी काट दी।
2. "जब उन्हें अंधेरा मिलेगा, तभी दर्द समझेंगे"
विधायक वीरेंद्र जाति ने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि वे पिछले 10 दिनों से विभाग को चेतावनी दे रहे थे, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी। उन्होंने कहा, "अधिकारी सिर्फ एक घंटे की बिजली कटौती से तिलमिला गए, जबकि मेरी जनता हर दिन घंटों बिना बिजली के तड़पती है। जब तक बड़े साहबों के घरों का पंखा बंद नहीं होगा, उन्हें गरीबों का दर्द समझ नहीं आएगा।"
3. बिजली विभाग की कानूनी कार्रवाई
विधायक के इस 'स्टंट' को बिजली विभाग ने जानलेवा और गैरकानूनी बताया है। यूपीसीएल (UPCL) के अधिकारियों ने रुड़की के सिविल लाइंस थाने में विधायक के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
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बड़ा खतरा: विभाग का आरोप है कि विधायक ने बिना किसी 'प्रॉपर शटडाउन' के जीवित बिजली की लाइन काट दी, जिससे न केवल उनकी जान को खतरा हो सकता था, बल्कि क्षेत्र में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
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सरकारी काम में बाधा: विधायक पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों के काम में दखल देने के आरोप लगाए गए हैं।
4. राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर विधायक का यह वीडियो दो धड़ों में बंट गया है। एक वर्ग इसे 'जनता के नायक' का साहस बता रहा है जो अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी याद दिला रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे 'अराजकता' करार दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा बिजली के खंभे पर चढ़कर खुद लाइन काटना सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है।
निष्कर्ष
झबरेड़ा विधायक का यह एक्शन उत्तराखंड में बिजली संकट की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन कानून हाथ में लेना उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और क्या इस घटना के बाद झबरेड़ा की जनता को बिजली कटौती से सच में निजात मिलती है।