साल 2025 भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है। यह वर्ष केवल नई खोजों का नहीं, बल्कि 'प्रौद्योगिकी के उपभोगकर्ता' से 'प्रौद्योगिकी के निर्माता' बनने की दिशा में भारत के मौलिक रूपांतरण का साक्षी रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत@2047' के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए, भारत ने एआई, सेमीकंडक्टर और स्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी संप्रभुता स्थापित की है।
AI क्रांति: डिजिटल समावेशन का नया युग
भारत ने 'भारत एआई मिशन' के तहत ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लोकतांत्रिक बनाया है।
-
कंप्यूटिंग शक्ति: वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक भारत ने 15,916 नए जीपीयू (GPU) जोड़कर अपनी क्षमता को 38,000 जीपीयू के पार पहुँचा दिया है।
-
सस्ती तकनीक: जहाँ वैश्विक स्तर पर जीपीयू की दर ₹115 प्रति घंटा है, भारत सरकार इसे ₹67 प्रति घंटे की रियायती दर पर उपलब्ध करा रही है, ताकि ग्रामीण स्टार्टअप्स भी वैश्विक स्तर की एआई ट्रेनिंग कर सकें।
-
वैश्विक रैंकिंग: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल में भारत ने तीसरा स्थान हासिल किया है, जो इसे ब्रिटेन, जापान और फ्रांस जैसी अर्थव्यवस्थाओं से ऊपर खड़ा करता है।
सेमीकंडक्टर: आत्मनिर्भरता की नई सिलिकॉन वैली
मई 2025 में नोएडा और बेंगलुरु में 3-नैनोमीटर (3nm) चिप डिजाइन संयंत्रों की स्थापना भारत के तकनीकी इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ है।
-
स्वदेशी प्रोसेसर: आईआईटी मद्रास की 'शक्ति' पहल के तहत 7nm प्रोसेसर का विकास और स्वदेशी विक्रम-32-बिट चिप का निर्माण यह दर्शाता है कि भारत अब अपनी 90% आयात निर्भरता को खत्म करने की ओर अग्रसर है।
-
रणनीतिक निवेश: वर्तमान में 10 सेमीकंडक्टर इकाइयां ₹1.60 लाख करोड़ के निवेश के साथ कार्यरत हैं। भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर खपत का 10% हिस्सा हासिल करना है।
महत्वपूर्ण खनिज: भविष्य की ऊर्जा की आधारशिला
बिना कोबाल्ट और लिथियम के एआई और ईवी (EV) क्रांति संभव नहीं है। इसीलिए जनवरी 2025 में ₹16,300 करोड़ के साथ राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया गया।
-
अन्वेषण: जीएसआई (GSI) 2025-26 के दौरान 227 खनिज अन्वेषण परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
-
रीसाइक्लिंग: भारत ने 'सर्कुलर इकोनॉमी' को अपनाते हुए खनिजों के पुनर्चक्रण के लिए ₹1,500 करोड़ की योजना शुरू की है, ताकि ई-कचरे से बहुमूल्य तत्व निकाले जा सकें।
स्पेस साइंस: पृथ्वी से परे बढ़ते कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2025 में अपनी वैश्विक श्रेष्ठता को पुनः सिद्ध किया है:
-
NISAR मिशन: 30 जुलाई 2025 को नासा और इसरो के साझा प्रयास से दुनिया का सबसे उन्नत रडार उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
-
गगनयान की सफलता: जुलाई 2025 में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर लौटे, जो भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन (गगनयान) की दिशा में एक बड़ी सफलता है।