मुंबई, 02 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। किसानों की कर्जमाफी को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस ने महायुति सरकार पर चुनावी वादे से पलटने का आरोप लगाया। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बुधवार को कहा कि बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन ‘गजनी सिंड्रोम’ से पीड़ित है। वे किसानों की कर्जमाफी का अपना चुनावी वादा भूल चुके हैं। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में भी कर्जमाफी और महिलाओं को पैसे देने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। सिर्फ जनता को असली मुद्दों से दरकिनार कर औरंगजेब के मकबरे जैसे विषयों से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। अब कांग्रेस ने महायुति सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार किसानों की कर्जमाफी को लेकर ठोस कदम नहीं उठाती, तो किसान आंदोलन होगा। सपकाल ने कहा, सरकार को बुआई सीजन से पहले किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए, या फिर केंद्र से स्पेशल राहत पैकेज लेना चाहिए। इससे पहले 29 मार्च को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कर्जमाफी से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती और किसानों को समय पर अपने कर्ज की किश्तें चुकानी चाहिए।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया RSS मुख्यालय दौरे को लेकर भी सवाल उठाए। सपकाल ने कहा कि मोदी जी संघ की शरण में गए थे, क्योंकि अब उनका पीएम पद खतरे में है। इससे यह दिखता है कि उनकी पकड़ कमजोर हो रही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए 5 अक्टूबर को एकनाथ शिंदे ने महायुति के घोषणा पत्र के 10 प्रमुख वादों का ऐलान किया था। एकनाथ शिंदे ने कोल्हापुर में जनसभा के दौरान कहा था कि विजन महाराष्ट्र 2029 के लिए सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा किया जाएगा।