मॉस्को/वॉशिंगटन: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आधिकारिक आवास, ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस पर कथित ड्रोन हमले को लेकर मचे वैश्विक घमासान में एक नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) की हालिया जांच रिपोर्ट ने पुतिन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुतिन के आवास या उन पर किसी भी तरह के हमले का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। इस खुलासे के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब तक इस मुद्दे पर नरम रुख अपनाए हुए थे, उन्होंने भी पुतिन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
CIA की जांच: हमले का कोई निशान नहीं
रूसी सरकार ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति पुतिन की हत्या की साजिश के तहत क्रेमलिन पर ड्रोन से हमला किया। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के आकलन में पाया गया कि यूक्रेन ने पुतिन के आवास को निशाना नहीं बनाया था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह रूस की एक सुनियोजित "डिस्कंफर्ट स्ट्रेटेजी" (discomfort strategy) हो सकती है, जिसका उद्देश्य शांति वार्ता से पहले खुद को पीड़ित दिखाना और यूक्रेन को बदनाम करना है।
डोनाल्ड ट्रंप का 'मगरमच्छी आंसू' वाला वार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में इस घटना पर चिंता जताई थी, लेकिन सीआईए की रिपोर्ट सामने आने के बाद उनका रुख पूरी तरह बदल गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर 'न्यूयॉर्क पोस्ट' के एक तीखे संपादकीय को साझा किया, जिसका शीर्षक था— "हमें पुतिन के मगरमच्छी आंसुओं (Crocodile Tears) से बचाओ।" संपादकीय में पुतिन के दावों को सफेद झूठ करार देते हुए कहा गया कि वे शांति की आड़ में दुनिया को मूर्ख बना रहे हैं। ट्रंप ने इस पर अपनी सहमति जताते हुए लिखा, "पूरी तरह सही! पुतिन को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।" ट्रंप के इस बयान ने रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक दरार को और गहरा कर दिया है।
क्या रूस ने खुद रची थी साजिश?
दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम (S-400) के बावजूद क्रेमलिन तक ड्रोन का पहुंचना विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रहा था। अब सीआईए की रिपोर्ट के बाद यह आशंका प्रबल हो गई है कि क्या यह रूस द्वारा खुद रची गई कोई साजिश थी? यूक्रेन ने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसका लक्ष्य अपनी जमीन की रक्षा करना है, न कि किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या। इस घटनाक्रम ने न केवल रूस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वैश्विक नेताओं के बीच पुतिन की विश्वसनीयता को भी बड़ा झटका दिया है।