पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और भ्रष्टाचार निरोधक मामलों के पूर्व सलाहकार मिर्जा शहजाद अकबर पर ब्रिटेन के कैम्ब्रिज शहर में हुआ जानलेवा हमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं, जिससे उनकी नाक और जबड़ा टूट गया है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि यह पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के विदेशों तक फैले हिंसक विस्तार की ओर भी इशारा करती है।
हमले का विवरण: घर के भीतर बर्बरता
मिर्जा शहजाद अकबर ने स्वयं इस भयावह घटना का विवरण साझा किया है। उनके अनुसार, हमला गुरुवार सुबह करीब 8:00 बजे हुआ। उनके घर की घंटी बजी और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, एक अज्ञात व्यक्ति (जो कथित तौर पर गोरा था) ने उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमलावर ने कई मिनटों तक उनके चेहरे पर मुक्के मारे।
अकबर ने बताया कि उन्होंने प्रतिरोध करने की कोशिश की, जिसके बाद हमलावर वहां से फरार हो गया। शोर सुनकर जब उनका परिवार नीचे आया, तब तक वे बुरी तरह लहूलुहान हो चुके थे। अस्पताल ले जाने पर पता चला कि उनके चेहरे पर फ्रैक्चर है और उन्हें लंबी चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना होगा। ब्रिटिश पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और इसे 'टारगेटेड अटैक' के रूप में देखा जा रहा है।
सेना प्रमुख पर गंभीर आरोप
शहजाद अकबर ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। अकबर का मानना है कि यह हमला उनकी हालिया बयानबाजी का नतीजा है। पिछले कुछ दिनों से अकबर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की कड़ी आलोचना कर रहे थे।
हाल ही में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने जनरल मुनीर का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए उन्हें 'कायर' कहा था। अकबर ने आरोप लगाया था कि रक्षा प्रमुख पिछले साढ़े तीन सालों से पाकिस्तान को डर और आतंक के दम पर चलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब वे खुद डरे हुए हैं। इसी बयान को इस हमले की मुख्य वजह माना जा रहा है।
राजनीतिक मायने और पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब मिर्जा शहजाद अकबर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले भी उन पर एसिड अटैक की कोशिश की गई थी। अकबर, इमरान खान की सरकार में बेहद ताकतवर पद पर थे और उन्होंने कई भ्रष्टाचार के मामलों की जांच का नेतृत्व किया था। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद, वे पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। पार्टी का कहना है कि यह हमला उन आवाजों को दबाने की कोशिश है जो सत्ता के खिलाफ बोल रही हैं। दूसरी तरफ, पाकिस्तान से भागकर विदेश में शरण लेने वाले कई अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता भी अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
सुरक्षा और कूटनीतिक निहितार्थ
ब्रिटेन जैसे देश में एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक व्यक्ति पर इस तरह का हमला होना ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती है। यदि यह साबित होता है कि हमले के तार किसी विदेशी मुल्क की सत्ता या सेना से जुड़े हैं, तो यह दो देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का कारण बन सकता है।