इस मुस्लिम देश में भारत का 1 रुपया आपको देगा राजाओं वाली फीलिंग? 1 लाख में हो जाएंगे करोड़पति

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Posted On:Monday, December 22, 2025

भारतीय रुपया अक्सर वैश्विक मंच पर अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड या यूरो जैसी मुद्राओं के सामने संघर्ष करता नजर आता है, जिससे कई बार यह धारणा बन जाती है कि हमारी करेंसी कमजोर है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जहां भारतीय रुपया एक 'सुपरपावर' की तरह व्यवहार करता है। इन्हीं देशों में से एक है मध्य एशिया का खूबसूरत देश—उज्बेकिस्तान।

उज्बेकिस्तान की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटक अक्सर वहां की करेंसी के गणित को देखकर हैरान रह जाते हैं। आइए समझते हैं कि उज्बेकिस्तान में भारतीय रुपया कितना ताकतवर है और इसके पीछे के आर्थिक कारण क्या हैं।

रुपया बनाम सोम: आंकड़ों का जादू

उज्बेकिस्तान की आधिकारिक मुद्रा को 'उज्बेकिस्तानी सोम' (Uzbekistani Som) कहा जाता है। ताजा वित्तीय आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रुपये की तुलना में सोम की कीमत काफी कम है।

  • विनिमय दर: वर्तमान में 1 भारतीय रुपया लगभग 153 उज्बेकिस्तानी सोम के बराबर है (बाजार की स्थिति के अनुसार यह 134 से 155 के बीच बदलती रहती है)।

  • करोड़पति बनने का मौका: यदि आप भारत से मात्र 1 लाख रुपये लेकर उज्बेकिस्तान जाते हैं, तो वहां की करेंसी में बदलते ही यह रकम लगभग 1.53 करोड़ सोम हो जाती है। यह आंकड़ा सुनने में किसी को भी 'करोड़पति' जैसा महसूस करा सकता है।

इतना बड़ा अंतर क्यों?

भारतीय रुपया और उज्बेकिस्तानी सोम के बीच इस भारी अंतर के पीछे मुख्य रूप से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार और ढांचा है।

  1. सीमित अर्थव्यवस्था: उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कपास (Cotton), सोना और प्राकृतिक गैस के निर्यात पर टिकी है। इसके विपरीत, भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका आधार कृषि के साथ-साथ आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बहुत व्यापक है।

  2. मुद्रा का अवमूल्यन: उज्बेकिस्तान ने पिछले कुछ दशकों में कई आर्थिक सुधारों और मुद्रा के अवमूल्यन (Devaluation) का सामना किया है, जिससे इसकी वैल्यू गिर गई, जबकि भारतीय रुपया वैश्विक बाजार में अधिक स्थिर रहा है।

भारतीय पर्यटकों के लिए 'बजट स्वर्ग'

यही कारण है कि उज्बेकिस्तान हाल के वर्षों में भारतीय पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है।

  • सस्ती सुविधाएं: वहां होटल, टैक्सी और स्थानीय परिवहन के खर्च भारतीय रुपये में बदलने पर काफी कम लगते हैं। ताशकंद, समरकंद और बुखारा जैसे ऐतिहासिक शहरों की यात्रा एक बजट ट्रिप में पूरी की जा सकती है।

  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव: समरकंद की वास्तुकला और वहां के पुराने बाजार भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। भारत और उज्बेकिस्तान का सांस्कृतिक रिश्ता सदियों पुराना है, जो खान-पान और संगीत में भी झलकता है।

  • खरीदारी और भोजन: उज्बेकिस्तान में ताजे फल, अनाज और सब्जियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। वहां का 'उज्बेक पुलाव' और 'कबाब' भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, और करेंसी की ताकत की वजह से यहां भोजन करना जेब पर भारी नहीं पड़ता।


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