यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर दुनिया को एक ऐसा संदेश दिया है जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह संदेश न केवल भावुक था, बल्कि इसमें रूस के प्रति गहरा आक्रोश और भविष्य की शांति के लिए एक विस्तृत खाका भी शामिल था। हालांकि, इस संदेश में पुतिन के लिए इस्तेमाल किए गए कड़े शब्दों ने अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा किए जा रहे शांति प्रयासों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
"उसका अंत हो जाए": जेलेंस्की का तीखा प्रहार
जेलेंस्की ने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक वीडियो संदेश में यूक्रेनी जनता की अटूट इच्छाशक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस के अनगिनत हमलों के बावजूद यूक्रेन की एकता को तोड़ा नहीं जा सका है। लेकिन सबसे अधिक चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम लिए बिना उनके अंत की कामना की।
जेलेंस्की ने कहा:
"आज हम सबका एक ही सपना है और वह यह है कि 'उसका अंत हो जाए', जैसा कि हर कोई मन ही मन कहता है। हम उस शांति के हकदार हैं जिसके लिए हम लड़ रहे हैं और ईश्वर से उसी की प्रार्थना करते हैं।"
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलेंस्की का यह बयान हाल ही में यूक्रेन पर हुए किंजल मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों के हमलों का नतीजा है, जिसने कड़ाके की ठंड में यूक्रेन की बिजली व्यवस्था को ठप कर दिया और निर्दोष नागरिकों की जान ली।
जेलेंस्की का 20-पॉइंट पीस प्लान: क्या है नया?
शांति की दिशा में कदम बढ़ाते हुए जेलेंस्की ने 20 बिंदुओं का एक शांति प्रस्ताव पेश किया है। इस प्लान की सबसे बड़ी विशेषता पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र (डोनबास) को लेकर उनका लचीला रुख है।
शांति प्रस्ताव की मुख्य बातें:
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विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ): जेलेंस्की पूर्वी यूक्रेन से अपनी सेनाएं वापस बुलाने को तैयार हैं, बशर्ते रूस भी पीछे हटे। इस क्षेत्र को एक विसैन्यीकृत क्षेत्र घोषित किया जाए, जिसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय शांति सेना करे।
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परमाणु सुरक्षा: प्रस्ताव में जापोरिजिया परमाणु ऊर्जा प्लांट (ZNPP) के आसपास भी इसी तरह की व्यवस्था की मांग की गई है ताकि परमाणु आपदा के खतरे को टाला जा सके।
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मुक्त आर्थिक क्षेत्र: अमेरिका के सुझाव पर यूक्रेन ने एक मुक्त आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में मदद कर सके।
शांति वार्ता में चुनौतियां
जेलेंस्की का यह 20-पॉइंट प्लान डोनबास और जापोरिजिया जैसे विवादित क्षेत्रों पर एक मध्यम मार्ग निकालने की कोशिश है। हालांकि, कूटनीतिक रूप से यह स्थिति जटिल है:
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रूस का रुख: पुतिन के लिए "मौत की दुआ" मांगने वाले बयान के बाद रूस इस वार्ता की मेज पर कितनी गंभीरता से आएगा, यह बड़ा सवाल है। रूस पहले ही जेलेंस्की के कार्यकाल की वैधता पर सवाल उठा चुका है।
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अमेरिका का दबाव: डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के तहत अमेरिका जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने का दबाव बना रहा है। जेलेंस्की का यह प्लान अमेरिकी प्रस्तावों और यूक्रेनी संप्रभुता के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश है।
निष्कर्ष
क्रिसमस के इस संदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि जेलेंस्की शांति तो चाहते हैं, लेकिन वे पुतिन के नेतृत्व वाले रूस के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं। उनका 20-पॉइंट प्लान एक ओर कूटनीतिक विकल्प पेश करता है, तो दूसरी ओर उनका कड़ा लहजा यह बताता है कि युद्ध के मैदान में संघर्ष अभी थमा नहीं है। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या यह नया शांति प्रस्ताव युद्ध को खत्म करने की शुरुआत बनेगा या फिर यह केवल एक और असफल कोशिश बनकर रह जाएगा।