राजनीतिक लाभ के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, पाकिस्तानी सेना की चेतावनी

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Posted On:Thursday, December 25, 2025

पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने एक सुर में चेतावनी दी है कि वे राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और अखंडता को कमजोर करने वाले किसी भी 'दुर्भावनापूर्ण हितों' को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा खतरों की व्यापक समीक्षा की गई।

सेना और जनता के बीच 'बंटवारे' की साजिश

कोर कमांडरों के सम्मेलन के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि कुछ तत्व सशस्त्र बलों और पाकिस्तान के लोगों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सेना ने संकल्प लिया कि किसी भी व्यक्ति या समूह को सेना की छवि धूमिल करने या समाज को विभाजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के समय में सेना के प्रति जनता के एक वर्ग में नाराजगी देखी गई है।

इमरान खान और 'डिजिटल हमलों' पर तल्खी

हालांकि बयान में सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया, लेकिन संदर्भ पूरी तरह स्पष्ट था। हाल ही में सेना की मीडिया शाखा (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने खान पर जेल में रहते हुए भी मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सेना के खिलाफ "सुनियोजित हमले" करने का आरोप लगाया। सेना ने ऐसे प्रयासों को 'आत्ममुग्धता' और 'मानसिक बीमारी' करार देते हुए चेतावनी दी कि अब पलटवार किया जाएगा।

आंतरिक स्थिरता और बॉर्डर की सुरक्षा

जनरल मुनीर ने अपने संबोधन में 'अराजकता' (Fitna) के प्रति सचेत किया। उनका मानना है कि जब किसी देश के भीतर मतभेद और बंटवारा बढ़ता है, तो वह देश को अंदर से खोखला कर देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:

  • राष्ट्रीय एकता: चुनौतियों के समय राष्ट्र और सेना का एक साथ खड़ा होना अनिवार्य है।

  • बॉर्डर की स्थिति: आंतरिक कलह का फायदा दुश्मन उठा सकते हैं, जिससे सीमाओं पर संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • आतंकवाद और कट्टरपंथ: सेना इन दोनों को देश के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानती है।

इस्लामिक मौलवियों के साथ संवाद

जनरल मुनीर ने केवल सैन्य बलों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि हाल ही में इस्लामिक मौलवियों के एक सम्मेलन में भी शिरकत की। वहां उन्होंने "अराजकता" फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया। यह इस बात का संकेत है कि सेना अब कट्टरपंथी और धार्मिक समूहों के साथ मिलकर अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।


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