अमेरिका और वेनेजुएला के बीच कूटनीतिक और आर्थिक युद्ध अब कैरेबियन सागर की लहरों पर एक खतरनाक सैन्य और रणनीतिक मोड़ ले चुका है। हालिया घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नवनिर्वाचित ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़, यानी तेल निर्यात को पूरी तरह से ठप करने के मिशन पर है। रविवार को अमेरिकी कोस्ट गार्ड द्वारा एक और 'प्रतिबंधित' तेल टैंकर का पीछा करना इस आक्रामक नीति का नवीनतम उदाहरण है।
'शैडो फ्लीट' पर अमेरिका का प्रहार
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जिस जहाज का पीछा किया जा रहा है, वह वेनेजुएला के 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) का हिस्सा है। 'शैडो फ्लीट' उन जहाजों के बेड़े को कहा जाता है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाकर चोरी-छिपे तेल का परिवहन करते हैं।
जहाज के छिपने के तरीके:
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फर्जी झंडा (Flag Hopping): यह टैंकर किसी अन्य देश का फर्जी झंडा लगाकर समुद्र में चल रहा था ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों की आंखों में धूल झोंकी जा सके।
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पहचान छिपाना: इन जहाजों के ट्रांसपोंडर (AIS) अक्सर बंद कर दिए जाते हैं ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न हो सके।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस विशेष जहाज पर पहले से ही न्यायिक जब्ती का आदेश जारी था। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस ताजा ऑपरेशन पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की सक्रियता बड़े संकेत दे रही है।
लगातार जब्ती और ट्रंप की 'ब्लॉकहेड' नीति
पिछले दो हफ्तों के भीतर यह तीसरा बड़ा मौका है जब अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े जहाजों पर सीधी कार्रवाई की है:
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10 दिसंबर: अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना ने 'स्किपर' नाम के एक टैंकर को जब्त किया। यह जहाज बिना किसी राष्ट्रीय झंडे के चल रहा था, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून में 'स्टेटलेस' माना जाता है।
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21 दिसंबर (शनिवार): पनामा के झंडे वाले जहाज 'सेंट्रीज़' को जब्त किया गया। व्हाइट हाउस ने इसे वेनेजुएला का "चोरी का तेल" ले जाने वाला जहाज करार दिया।
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ताजा कार्रवाई: रविवार को एक और टैंकर का पीछा करना इस बात की पुष्टि करता है कि अब अमेरिका केवल प्रतिबंध नहीं लगा रहा, बल्कि भौतिक रूप से समुद्र में नाकाबंदी (Blockade) कर रहा है।
निकोलस मादुरो पर बढ़ता दबाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने बयानों में साफ कर दिया था कि वे वेनेजुएला के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी करेंगे। ट्रंप का उद्देश्य निकोलस मादुरो की सरकार को मिलने वाले विदेशी फंड को पूरी तरह से काटना है। वेनेजुएला की आय का मुख्य स्रोत कच्चा तेल है, और यदि उसके टैंकर वैश्विक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते, तो देश के भीतर आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक जोखिम
अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और संप्रभुता के सवालों को भी जन्म दे रही है। वेनेजुएला इसे 'समुद्री डकैती' करार दे रहा है, जबकि अमेरिका इसे 'वैश्विक सुरक्षा और प्रतिबंधों का पालन' बता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो कैरेबियन सागर में अमेरिका और वेनेजुएला के सहयोगियों (जैसे रूस या ईरान) के बीच सैन्य टकराव की स्थिति भी बन सकती है।
निष्कर्ष: अमेरिका की 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने वेनेजुएला को बैकफुट पर धकेल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मादुरो सरकार इस नाकाबंदी का कोई तोड़ निकाल पाती है या फिर अमेरिकी दबाव के आगे उन्हें झुकना पड़ेगा। फिलहाल, कैरेबियन सागर में बढ़ती सैन्य हलचल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट की आहट दे रही है।