सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अजरबैजान जैसे देशों से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों को 'भिखारी' होने के आरोप में डिपोर्ट (निर्वासित) किए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है। इस गंभीर मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रसिद्ध भू-राजनीतिक विशेषज्ञ कमर चीमा ने अपनी सरकार और खुफिया तंत्र पर तीखे सवाल उठाए हैं।
डराने वाले आंकड़े और वैश्विक छवि
कमर चीमा ने बताया कि अकेले सऊदी अरब ने 24,000, UAE ने 6,000 और अजरबैजान ने 2,500 पाकिस्तानी भिखारियों को उनके देशों से निकाल दिया है। चीमा के अनुसार, यह केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्र की प्रतिष्ठा के पतन का संकेत है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जिन देशों (जैसे अजरबैजान) के साथ पाकिस्तान हाल ही में घनिष्ठ संबंध बना रहा था, वहां भी पाकिस्तानियों ने 'चूना लगाना' शुरू कर दिया है।
इस स्थिति का सबसे बुरा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ रहा है। UAE ने अब कई श्रेणियों में पाकिस्तानियों को वीजा देना बंद कर दिया है और केवल 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
एक "संगठित अपराध" के रूप में भीख
कमर चीमा ने एक चौंकाने वाला दावा किया कि पाकिस्तान में भीख मांगना अब केवल मजबूरी नहीं, बल्कि एक "हाइली स्ट्रक्चर्ड एंटरप्राइज" (अत्यधिक संगठित उद्योग) बन चुका है। उनके अनुसार:
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यह एक सफल और संगठित बिजनेस मॉडल की तरह काम कर रहा है।
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हजारों लोग इस "इंडस्ट्री" का हिस्सा हैं।
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हवाई अड्डों पर तैनात फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) और सरकार के अन्य लोग इस सिंडिकेट में शामिल हो सकते हैं।
चीमा ने तर्क दिया कि क्या यह संभव है कि 32,000 से अधिक लोग अधिकारियों की नजरों से बचकर विदेश चले गए? उन्होंने सवाल उठाया कि जब ये लोग अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सवार होते हैं, तो क्या सुरक्षा एजेंसियों को यह समझ नहीं आता कि ये लोग पर्यटन या काम के इरादे से नहीं, बल्कि भीख मांगने के मकसद से जा रहे हैं।
पवित्र स्थलों की मर्यादा पर चोट
सबसे दुखद पहलू यह है कि ये लोग 'उमराह' या 'हज' के नाम पर वीजा लेते हैं और मक्का-मदीना जैसे पवित्र स्थलों पर पहुँचकर भीख मांगने की दुकानें सजा लेते हैं। कमर चीमा ने कहा कि लोग वहां खुदा से माफी मांगने जाते हैं, लेकिन कुछ लोग वहां अपनी व्यावसायिक दुकानें बना लेते हैं। उन्होंने इसे न केवल राष्ट्रीय शर्मिंदगी बल्कि धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन भी बताया।
सजा और जवाबदेही की मांग
विशेषज्ञ का मानना है कि जो लोग पकड़े नहीं गए, उनकी संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है और वे दुनिया के अलग-अलग कोनों में पाकिस्तान की साख खराब कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि:
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इस पूरी प्रक्रिया की गहन जांच (In-depth Study) होनी चाहिए।
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विदेशों में भीख मांगकर देश का नाम खराब करने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।
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उन अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इन "भिखारी सिंडिकेट्स" को विदेशों में जाने की अनुमति दी।