बांग्लादेश की राजधानी ढाका में महीनों से चल रही उथल-पुथल के बीच, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मौजूदा अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख डॉ. मोहम्मद यूनुस पर तीखे हमले किए हैं। एक विशेष साक्षात्कार में हसीना ने न केवल अपनी सरकार के पतन को एक साजिश बताया, बल्कि मौजूदा शासन के तहत देश की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता भी व्यक्त की।
मोहम्मद यूनुस पर विफलता के आरोप
शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को देश की मौजूदा अराजकता के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने दावा किया कि जिस 'अव्यवस्था' का बहाना बनाकर उनकी चुनी हुई सरकार को हटाया गया था, आज बांग्लादेश उससे कहीं अधिक भयावह दौर से गुजर रहा है। हसीना ने हालिया हिंसा और शरीफ उस्मान हादी की हत्या जैसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उनके अनुसार, यूनुस सरकार केवल विरोधियों को निशाना बनाने में लगी है, जबकि देश जल रहा है।
भारत के साथ बिगड़ते संबंधों पर चिंता
भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक रिश्तों को लेकर शेख हसीना ने मौजूदा प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि डॉ. यूनुस के नेतृत्व में ढाका से नई दिल्ली के खिलाफ लगातार 'कठोर और शत्रुतापूर्ण' बयानबाजी हो रही है।
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अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हसीना ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में विफल रही है। हाल ही में एक हिंदू युवक की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे कट्टरपंथी ताकतों की बढ़ती ताकत का परिणाम बताया।
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भरोसेमंद मित्र: उन्होंने भारत को बांग्लादेश का सबसे स्थायी और विश्वसनीय साझेदार बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच जो विश्वास अवामी लीग के कार्यकाल में बना था, वह भविष्य में पुनः स्थापित होगा।
अवामी लीग के बिना चुनाव की वैधता पर सवाल
आगामी चुनावों को लेकर शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ी चेतावनी दी है। उनका तर्क है कि अवामी लीग, जो देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक पार्टी है, उसे बाहर रखकर कराया गया कोई भी चुनाव न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष। उन्होंने कहा कि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशें जनता के जनादेश का अपमान हैं। हसीना ने चेतावनी दी कि यदि लोगों को उनकी पसंदीदा पार्टी को वोट देने से रोका गया, तो नई सरकार को जनता की वैधता कभी हासिल नहीं होगी।
प्रत्यर्पण और न्याय पर रुख
भारत में अपनी शरण को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खून-खराबा रोकने के लिए देश छोड़कर आईं थीं। उन्होंने कहा, "मैं न्याय का सामना करने से नहीं डरती, लेकिन मौजूदा ट्रिब्यूनल का इस्तेमाल केवल अवामी लीग को खत्म करने की राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है।"
हसीना ने उन मांगों को खारिज कर दिया जिनमें उनके प्रत्यर्पण की बात की जा रही है। उन्होंने भारत सरकार और वहां के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें इस कठिन समय में सम्मान और सुरक्षा प्रदान की है।