मुंबई, 04 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। भाजपा ने पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे और उन्हें जेल भेजने की मांग की। भाजपा ने सिलीगुड़ी में विरोध रैली निकाली। इस दौरान विधायक शंकर घोष ने कहा, 'हम ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग करते हैं। पूरे मंत्रिमंडल पर दर्ज किया जाना चाहिए। अधिकतर मंत्रियों पर पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है। वे जेल जा रहे हैं, तो फिर ममता पर क्यों नहीं। वहीं, केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि ममता बनर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में जेल जाने वाली दूसरी मुख्यमंत्री होंगी। हरियाणा के चार बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत ओम प्रकाश चौटाला ऐसे ही एक मामले में 2013 में जेल गए थे। दरअसल, 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) की 2016 में 25 हजार शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध बताते हुए भर्ती रद्द कर दी थी। मजूमदार ने कहा, 26 हजार भर्ती में से करीब 20 हजार का चयन सही तरीके से हुआ। घोटाले का फायदा TMC नेताओं को। भ्रष्टाचार में शामिल पूरे मंत्रिमंडल को जेल भेजा जाए। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकार को भ्रष्ट तरीके से भर्ती हुए उम्मीदवारों की पहचान करने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। इस वजह से सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति समाप्त कर दी गई। सरकार को वास्तविक उम्मीदवारों का भविष्य बचाने के लिए कानूनी संभावना तलाशनी चाहिए।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ममता ने कहा, वह व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करती हैं, लेकिन उनकी सरकार इसे लागू करेगी और चयन प्रक्रिया को फिर से दोहराएगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्षी BJP और CPM चाहते हैं कि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाए। जिसके बाद ममता बनर्जी पर टिप्पणी करते हुए भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है तो बनर्जी को कानून से कोई नहीं बचा पाएगा। उन्हें अब सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर उनमें जरा भी जिम्मेदारी बची है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। फैसले के बाद बनर्जी की विश्वसनीयता और वैधता खत्म हो गई है। वे निश्चित रूप से जेल जाएंगी। अगर वे सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रही हैं तो उन पर अदालत की अवमानना का मामला चलना चाहिए। बर्खास्त किए गए निर्दोष कर्मचारियों को मुख्यमंत्री राहत कोष से वेतन दिया जाना चाहिए।