मन्नार/नई दिल्ली: भारत और भूटान ने अपने ऐतिहासिक आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देते हुए केरल के मन्नार में आयोजित दो दिवसीय 7वीं संयुक्त सीमा शुल्क समूह (JGC) की बैठक को सफलतापूर्वक संपन्न किया। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता सीबीआईसी (CBIC) के विशेष सचिव योगेंद्र गर्ग और भूटान के राजस्व एवं सीमा शुल्क महानिदेशक सोनम जामत्शो ने की। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच न केवल व्यापारिक मात्रा बढ़ाना है, बल्कि सीमा पार सुरक्षा और प्रबंधन को आधुनिक बनाना भी है।
डिजिटल नवाचार और सुरक्षा समन्वय
बैठक के दौरान दोनों देशों ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और 'इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम' (ECTS) को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
- डेटा विनिमय: सीमा शुल्क डेटा के आगमन-पूर्व आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर चर्चा हुई, जिससे माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम होगा।
- खुफिया जानकारी: तस्करी रोकने के लिए दोनों पक्षों ने खुफिया जानकारी साझा करने और नियम-कानूनों के प्रवर्तन में एक-दूसरे का सहयोग करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
आर्थिक वृद्धि और समुद्री अनुभव
भारत वर्तमान में भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसकी कुल व्यापार में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 1.9 अरब डॉलर के पार पहुँच गया है, जो 46% की भारी वृद्धि दर्शाता है।
- बुनियादी ढांचा: पश्चिम बंगाल और असम में स्थित 10 अधिसूचित भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं के सुधार की समीक्षा की गई।
- कोच्चि बंदरगाह का दौरा: भू-परिवेष्ठित (Land-locked) देश होने के नाते भूटान के लिए समुद्री व्यापार के गुर सीखना महत्वपूर्ण था। भूटानी प्रतिनिधिमंडल ने कोच्चि बंदरगाह पर कंटेनर हैंडलिंग, बर्थिंग और समुद्री गश्त की बारीकियों को समझा। यह बैठक 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत दोनों राष्ट्रों के बीच एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।